क्रान्तिकारी नीरा आर्य की कहानी। जेल में जब मेरे स्तन काटे गए ! इतनी यातनाएं दी गईं और नेहरू कहता है चरखा से आजादी मिली..?? स्वाधीनता संग्राम की मार्मिक गाथा। एक बार अवश्य पढ़े, नीरा आर्य (१९०२ - १९९८) की संघर्ष पूर्ण जीवनी: नीरा आर्य का विवाह ब्रिटिश भारत में सीआईडी इंस्पेक्टर श्रीकांत जयरंजन दास के साथ हुआ था | नीरा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जान बचाने के लिए अंग्रेजी सेना में अपने अफसर पति श्रीकांत जयरंजन दास की हत्या कर दी थी | नीरा ने अपनी एक आत्मकथा भी लिखी है | इस आत्म कथा का एक ह्रदयद्रावक अंश प्रस्तुत है - 5 मार्च 1902 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत के खेकड़ा नगर में एक प्रतिष्ठित व्यापारी सेठ छज्जूमल के घर जन्मी नीरा आर्य आजाद हिन्द फौज में रानी झांसी रेजिमेंट की सिपाही थीं, जिन पर अंग्रेजी सरकार ने गुप्तचर होने का आरोप भी लगाया था। इन्हें नीरा नागिनी के नाम से भी जाना जाता है। इनके भाई बसंत कुमार भी आजाद हिन्द फौज में थे। इनके पिता सेठ छज्जूमल अपने समय के एक प्रतिष्ठित व्यापारी थे, जिनका व्यापार देशभर में फैला हुआ था। खासकर कलकत्ता में इनके पिताजी के व्यापार का म...
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इस्लाम अल्लाह है तो फिर पैगम्बर क्यों...? पैगम्बर है तो फिर कुरान क्यों...? ये तीनों थे तब इस्लाम को फैलाने की जरूरत क्यों...? सब बन्दे खुदा के तो कोई मुसलमान क्यों...? सभी मुसलमान ही थे तब आपस मे इतना फसाद क्यों...? शिया क्यों सुन्नी क्यों...? देवबंदी बरेलवी और अहमदिया क्यों...? दीन अल्लाह का तब ईमान लाने की ही जरूरत क्यों...? कायनात के निर्माता को नमाज की जरूरत क्यों...? इस्लाम सच्चा तो हदीस क्यों...? हज क्यों...? जमात क्यों...? मर्जी अल्लाह की तब जन्नत क्यों जहन्नम क्यों...? किस्मत तय है तब आख़िरत में हिसाब क्यों...? सब बराबर है तो औरत के लिए ही काला तिरपाल क्यों...? उसका काम मुकद्दस है तो खतना क्यों...? सीरत क्यों...? सुन्नत क्यों...? दाढ़ी क्यों...? टोपी क्यों...? मुल्लाओं की भीड़ क्यों...? आलिमों की फौज क्यों...? कुरान में विज्ञान तो जाहिलों की कौम क्यों...? जर्रे जर्रे में मौजूद तो मुनकर और नकीर क्यों...? क्यो अभी तक कुरान से निकले कोरोना का इलाज कुरान से कोई मौलवी मूल्ला खोज नही पाया? सब बन्दे अल्लाह के तो काफिर क्यों मुशरिक क्यों...? पूरी दुनिया ...
आगरा का इतिहास
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#681_वर्ष_बाद_आजाद_हुआ_आगरा आगरा 1080 में महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद से ही गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था।इसके बाद आगरा पर इस्लामी झंडा लहराता रहा। आगरा मुगलों की शक्ति का केंद्र रहा व यहां बैठकर वे बार बार हिन्दू राष्ट्रवाद को कुचलते रहे।यहां के लाल किले से मुगलों ने जितने अत्याचार हिन्दुओ पर किये इतने तो कहीं नहीं हुए। लेकिन समय सदा एक सा नहीं रहता भररपुर के शासक महाराजा सूरजमल बहुत शक्तिशाली सम्राट बन चुके थे। उन्होंने आगरा को मुगलों से मुक्त कराने का निश्चय किया व 4 मई 1761 को आगरा पर आक्रमण कर दिया।उन्होंने बलराम सिंह व अपने भतीजे वैर के राजा बहादुर सिंह के नेतृत्व में 3-4,000 सैनिक आगरा पर अधिकार करने के लिए भेजे। उस समय मुगलों(दिल्ली) की ओर से फाजिल खां यहां का किलेदार था। उसके पास 6-7,000 की सेना थी। राजा बलराम सिंह ने यमुना पार करने के लिए नाव मांगी तो मुगलों ने मना कर दिया। इसी को आधार बनाकर उन्होंने आक्रमण कर दिया व मुगली सेना को यमुना से हटने पर मजबूर कर दिया। उसके बाद जाट सेना आगरा के लाल किले पर 20 दिन तक घेरा डाले बैठी रही।अंदर मुगल सैनिक भय से कांप रहे ...