इस्लाम
अल्लाह है तो फिर पैगम्बर क्यों...?
पैगम्बर है तो फिर कुरान क्यों...?

ये तीनों थे तब इस्लाम को फैलाने की जरूरत क्यों...?
सब बन्दे खुदा के तो कोई मुसलमान क्यों...?
सभी मुसलमान ही थे तब आपस मे इतना फसाद क्यों...?
शिया क्यों सुन्नी क्यों...?
देवबंदी बरेलवी और अहमदिया क्यों...?
दीन अल्लाह का तब ईमान लाने की ही जरूरत क्यों...?
कायनात के निर्माता को नमाज की जरूरत क्यों...?

इस्लाम सच्चा तो हदीस क्यों...?
हज क्यों...?
जमात क्यों...?

मर्जी अल्लाह की तब जन्नत क्यों जहन्नम क्यों...?
किस्मत तय है तब आख़िरत में हिसाब क्यों...?
सब बराबर है तो औरत के लिए ही काला तिरपाल क्यों...?
उसका काम मुकद्दस है तो खतना क्यों...?

सीरत क्यों...?
सुन्नत क्यों...?
दाढ़ी क्यों...?
टोपी क्यों...?
मुल्लाओं की भीड़ क्यों...?
आलिमों की फौज क्यों...?

कुरान में विज्ञान तो जाहिलों की कौम क्यों...?
जर्रे जर्रे में मौजूद तो मुनकर और नकीर क्यों...?
क्यो अभी तक कुरान से निकले कोरोना का इलाज कुरान से कोई मौलवी मूल्ला खोज नही पाया?

सब बन्दे अल्लाह के तो काफिर क्यों मुशरिक क्यों...?
पूरी दुनिया उसी की तो सीरिया क्यों सूडान क्यों नाईजीरिया क्यो...?

खुदा को यहूदियों से बैर तो वो कौम कामयाब क्यों...?
मुसलमानों से मुहब्बत तो फिलिस्तीन परेशान क्यों...?
ईसाइयों से नफरत तो वो कौम खुशहाल क्यों...?

मस्जिद अल्लाह का घर तो सातों आसमान क्यों...?
हो, जा कहने से सब हो जाये तो फरिश्तों की जरूरत क्यों...?
हर शय पर कादिर तो शैतान आजाद क्यों...?

वह सबका मालिक तो कोई भूखा क्यों लाचार क्यों...?
वह सर्वशक्तिमान तो भय क्यों आतंक क्यों...?
शोषण क्यों व्यभिचार क्यों...?

इन सभी "क्यों" का जवाब मिल जाये?
तो मैं भी मुसलमान हो जाऊं.

अब कोई क्षतिग्रस्त शिश्न लिये मोमिन पिछवाड़ा उठा के इन सवालों के जवाब देगा क्या...???

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