आगरा का इतिहास

#681_वर्ष_बाद_आजाद_हुआ_आगरा

आगरा 1080 में महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद से ही गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था।इसके बाद आगरा पर इस्लामी झंडा लहराता रहा।

आगरा मुगलों की शक्ति का केंद्र रहा व यहां बैठकर वे बार बार हिन्दू राष्ट्रवाद को कुचलते रहे।यहां के लाल किले से मुगलों ने जितने अत्याचार हिन्दुओ पर किये इतने तो कहीं नहीं हुए।

लेकिन समय सदा एक सा नहीं रहता भररपुर के शासक महाराजा सूरजमल बहुत शक्तिशाली सम्राट बन चुके थे।
उन्होंने आगरा को मुगलों से मुक्त कराने का निश्चय किया व 4 मई 1761 को आगरा पर आक्रमण कर दिया।उन्होंने बलराम सिंह व अपने भतीजे वैर के राजा बहादुर सिंह के नेतृत्व में 3-4,000 सैनिक आगरा पर अधिकार करने के लिए भेजे।
उस समय मुगलों(दिल्ली) की ओर से फाजिल खां यहां का किलेदार था। उसके पास 6-7,000 की सेना थी।

राजा बलराम सिंह ने यमुना पार करने के लिए नाव मांगी तो मुगलों ने मना कर दिया। इसी को आधार बनाकर उन्होंने आक्रमण कर दिया व मुगली सेना को यमुना से हटने पर मजबूर कर दिया।
उसके बाद जाट सेना आगरा के लाल किले पर 20 दिन तक घेरा डाले बैठी रही।अंदर मुगल सैनिक भय से कांप रहे थे। और दिल्ली के बादशाह ने भी सुरजमल के भय से कोई सेना नहीं भेजी।
दोनों ओर से तोपें चली भयंकर युद्ध हुआ।लगभग 180 मुगल सैनिक मारे गए व 20 हिन्दू यौद्धा भी शहीद हुए।
कहते हैं इसी दौरान भरतपुर से महाराजा सूरजमल ने विशालतम लाखा तोप का परीक्षण किया था जिसका गोला इस किले में आकर गिरा था।

धीरे धीरे पूरे शहर पर अधिकार जमा लिया गया व अंत मे फाजिल खाँ ने हथियार डाल दिये व समझौता करके यह किला महाराजा सूरजमल को सौंप दिया।

इस तरह 12 जून 1761 को आगरा किले पर 681 साल बाद फिर से भगवा ध्वज लहराने लगा।
इसी किले से कुछ दूरी पर ही धर्म न छोडने पर 1 जनवरी 1670 में औरँगजेब ने बोटी बोटी काटी थी।इस तरह आगरा पर कब्जा करके मुगलों से उसका भी प्रतिशोध ले लिया गया।
इस किले पर कब्जा करके महाराजा सूरजमल ने इसे गंगाजल से शुद्ध करवाया व हवन क्रिया करके इसमें अपना राज्य स्थापित किया।

उन्होंने ताजमहल(तेजोमहालय) को वापिस मन्दिर बनाने की भी इच्छा जाहिर की लेकिन उनके राजपुरोहित जी ने कहा कि एक कब्रिस्तान को मन्दिर बनाना शुभ नहीं होगा।

यह किला व सम्पूर्ण आगरा 1774 तक जाट राजाओ के अधीन रहा।यहीं से हिन्दू धर्म रक्षक महाराजा जवाहर सिंह आदि अन्य भररपुर शासकों ने राज किया।

आगरा की जामा मस्जिद को महाराजा जवाहर सिंह ने खाली करवाकर उसमें अनाज मंडी खुलवा व पशुओं का तबेला खुलवा दिया था।
इस किले में महाराजा जवाहर सिंह की छत्री बनी हुई है तथा महाराजा नवल सिंह के नाम से एक हवेली भी बनी हुई हैम आगरा में महाराजा जवाहर सिंह ने एक सुंदर उद्यान भी बनवाया था।इसकेके अलावा भी कई निर्माण कार्य वहां किये गए।

जय हिन्दू ह्रदय सम्राट महाराजा सूरजमल की।

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